वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज के बारे में विस्तृत जानकारी दी, जाने पूरी रिपोर्ट

न्यूज़ इंडिया हिन्दी, टीम

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज के बारे में विस्तृत जानकारी दी, जाने पूरी रिपोर्ट

नई दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया है कि वित्त वर्ष 2019-20 के लिए सभी इनकम टैक्स रिटर्न की अंतिम तारीख को 31 जुलाई 2020 से बढ़ाकर 30 नवंबर 2020 कर दिया है. टैक्स ऑडिट की डेट 30 सितंबर 2020 से बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2020 की जा रही है.

टैक्स को लेकर दी ये राहत-रेसिडेंट्स को किए जाने वाले नॉन सैलरी पेमेंट के लिए टीडीएस, स्पेसिफाइड ​रेसिप्टस के लिए टीसीएस की रेट 31 मार्च 2021 तक मौजूदा रेट से 25% घटाई जा रही है. इससे 50000 करोड़ रुपये की लिक्विडिटी लोगों के हाथों में रहेगी. यह फैसला कल से ही लागू हो जाएगा.

30 सितंबर 2020 को खत्म होने जा रही असेसमेंट डेट को बढ़ाकर 31 दिसंबर 2020 कर दिया गया है. 31 मार्च 2021 को खत्म हो रही असेसमेंट डेट को बढ़ाकर 30 सितंबर 2021 किया जा रहा है. विवाद से विश्वास स्कीम में बिना अतिरिक्त अमाउंट के पेमेंट की अवधि बढ़ाकर 31 दिसंबर 2020 की जा रही है.

PF पर मिली ये राहत-15 हजार रुपये तक की सैलरी वालों का पीएफ सरकार भरेगी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह फैसला लिया है कि अगस्त तक कंपनी और कर्मचारियों की तरफ से 12 फीसदी 12 फीसदी की रकम EPFO में अपनी तरफ से जमा करेगी. देश में संगठित क्षेत्रों को ध्यान में रखकर यह फैसला लिया गया है. इसके साथ ही इस फैसले से 4 लाख से ज्यादा संस्थाओं को भी फायदा मिलेगा.

लेकिन इस योजना की कुछ शर्तें हैं. सरकार के इस ऐलान का फायदा सिर्फ उन्हीं कंपनियों को मिलेगा, जिनके पास 100 से कम कर्मचारी हैं और 90 फीसदी कर्मचारी की सैलरी 15,000 रुपये से कम है. यानी 15 हजार से ज्यादा तनख्वाह पाने वालों को इसका फायदा नहीं मिलेगा.

बिजनेसमैन के लिए हुए ये ऐलान- एमएसएमई को 3 लाख करोड़ रुपये की आर्थिक मदद की जाएगी. इन कारोबारियों को 4 साल तक बिना गारंटी के कर्ज मिलेगा. इस कदम से 45 लाख छोटी कंपनियों को फायदा मिलेगा. कुल मिलाकर MSME के 6 बड़े कदम उठाए गए है.

स्ट्रेस्ड MSME यानी कर्ज़ में डूबी कंपनियों के लिए 50 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इन कंपनियों को पैसे देकर फिर से पटरी पर लाने की कोशिश है.

जिन MSMEs में इक्विटी की समस्या है उन्हें सबऑर्डिनेट लोन दिया जाएगा. इसके लिए 20,000 करोड़ रुपए रखे गए हैं. इससे 2 लाख MSMEs की नकदी की समस्या दूर होगी.

सभी NPA या स्ट्रेस्ड लोन को इस स्कीम का फायदा मिलेगा. सरकार CGTMSE के लिए 4,000 करोड़ रुपए देगी जो बैंकों को आंशिक गारंटी देते हैं, वो इसका फायदा अब MSMEs को भी देंगे.

वित्त मंत्री ने बाताया लंबे सुझावों के बाद ये पैकेज बनाया गया है. इस पैकेज का मकसद भारत को आत्मनिर्भर बनाना है. लैंड, लेबर लिक्विडिटी, लॉ पैकेज के आधार हैं. PM मोदी ने आत्मनिर्भर भारत का विजन रखा है.  गरीबों के लिए कई स्कीम और रिफॉर्म लाए गए.लोगों के खातों में सीधे पैसे पहुंचा रहे हैं.

निर्मला सीतारमण ने बताया कि MSMEs को बिना किसी कोलैट्रल का 3 लाख करोड़ रुपए तक ऑटोमेटिक लोन मिलेगा. यह लोन 100 फीसदी गारंटीड और 4 साल के लिए होगा. यह स्कीम 21 अक्टूबर 2020 को खत्म होगी. इससे 45 लाख यूनिट्स को फायदा होगा. इससे उन्हें अपना कामकाज शुरू करने में मदद मिलेगी.

वित्त मंत्री बुधवार ने बताया 14 अलग-अलग उपाय किए गए हैं. इनमें से 6 MSMEs, 2 EPF, 2 NBFC और MFIs, 1 डिस्कॉम के लिए, 1 कॉन्ट्रैक्टर्स के लिए, 1 रियल एस्टेट के लिए और 3 टैक्स से जुड़े फैसले किए हैं.

देसी ब्रैंड्स को ग्लोबल ब्रैंडस बनाने पर जोर-वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया देसी ब्रैंड्स को ग्लोबल ब्रैंड्स बनाने पर जोर है.

आपको बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में अर्थव्यवस्था के रिवाइवल के लिए 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की घोषणा की. यह पैकेज देश की जीडीपी का 10 प्रतिशत है.

भारत का कोरोना राहत पैकेज दुनिया के सबसे बड़े पैकेज में से एक
जापान और अमेरिका के बाद स्वीडन ने अपनी जीडीपी का 12 फीसदी, जर्मनी ने 10.7 फीसदी के राहत पैकेज का ऐलान किया है. भारत का कोरोना राहत पैकेज इसकी जीडीपी का 10 फीसदी है.

भारत के बाद फ्रांस ने जीडीपी के 9.3 फीसदी, स्‍पेन ने 7.3 फीसदी, इटली ने 5.7 फीसदी, ब्रिटेन ने 5 फीसदी, चीन ने 3.8 फीसदी और दक्षिण कोरिया ने जीडीपी के 2.2 फीसदी के राहत पैकेज का ऐलान किया है.

लॉकडाउन में किसको, कितना नुकसान हुआ-

देशभर में जारी लॉकडाउन का तगड़ा झटका खुदरा कारोबारियों यानी ट्रेडर्स को लग रहा है. खुदरा कारोबारियों के संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) का कहना है कि बीते 50 दिन के लॉकडाउन में खुदरा व्यापारियों का करीब 7.50 लाख करोड़ रुपये का कारोबार नहीं हुआ है.

इसका असर सरकारी खजाने पर भी पड़ा है. केंद्र और राज्य सरकार को करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये GST राजस्व में भी नुकसान हुआ है. कोरोनावायरस महामारी संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए बीते 24 मार्च को देश में लॉकडाउन है.

देश की अर्थव्यवस्था में तीन बड़े घटक होते हैं. एग्रीकल्चर, मैन्यूफैक्चरिंग यानी जहां कच्चे माल से उत्पाद तैयार होता और सर्विस सेक्टर.

देश की लगभग आधी आबादी कृषि के सेक्टर से जुड़ी है और GDP में योगदान 17% का. अगर आसान शब्दों में समझें तो लॉकडाउन से एग्रीकल्चर सेक्टर को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ.

अब बच गए दो- मैन्यूफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर. 44 फीसदी रोजगार यहीं पर है. और जीडीपी में हिस्सा 70 फीसदी. लेकिन लॉकडाउन में न उद्योग-धंधे चल रहे हैं और सर्विस सेक्टर भी ठप है. देश को असली घाटा यहीं हो रहा है. कितना? एक हफ्ते में दो लाख करोड़ का नुकसान.