हिन्दी पत्रकारिता दिवस को लेकर न्यूज़ इंडिया हिन्दी के तरफ से विशेष...

हिन्दी पत्रकारिता दिवस को लेकर न्यूज़ इंडिया हिन्दी के  तरफ से विशेष...
हिन्दी पत्रकारिता दिवस

पत्रकार की आवाज़...

हिंदी पत्रकारिता दिवस पर शुभकामनाएं। हिंदी पत्रकारिता का देश में स्वर्णिम इतिहास रहा है। आज़ादी के आंदोलन से लेकर आज तक यह अपनी अहम भूमिका निभाती आयी है। निष्पक्ष पत्रकारिता हमारे लोकतंत्र की आवश्यकता है, जितनी मज़बूत पत्रकारिता होगी, उतना ही प्रजातंत्र भी सुदृढ़ होगा।

आज हिंदी पत्रकारिता दिवस (Hindi Journalism) है. आज ही के दिन साल 1826 में हिंदी भाषा का पहला समाचार पत्र उदन्त मार्तण्ड प्रकाशित हुआ था. इसकी शुरुआत  पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने कलकत्ता में साप्ताहिक समाचार पत्र के तौर पर किया था. शुक्ल ही इसके सम्पादक भी थे और प्रकाशक भी.

उदन्त मार्तण्ड का अर्थ है उगता हुआ सूरज. यह अखबार हर सप्ताह  मंगलवार को प्रकाशित होता था. उस वक़्त देश में अंगेजों का शासन था और बंगाल में अंग्रेजी के बाद बांग्ला और उर्दू का प्रभाव था. उस वक़्त हिंदी भाषा (Hindi Journalism) में एक भी समाचार पत्र मौजूद नहीं था. कलकत्ता में हिंदी भाषी पाठकों की कमी थी. जिसके कारण उन्हें समाचार पत्र डाक द्वारा भेजना पड़ता था. लिहाजा पोस्टल सर्विस महंगी होने और पैसों की कमी के चलते 4 दिसंबर 1827 में यह अखबार बंद हो गया था.

भारत वर्ष में हिंदी भाषा में ‘उदन्त मार्तण्ड’ के नाम से पहला समाचार पत्र 30 मई 1826 में निकाला गया था। इसलिए इस दिन को हिंदी पत्रकारिता दिवस के रूप में मनाया जाता है। पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने इसे कलकत्ता में एक साप्ताहिक समाचार पत्र के तौर पर शुरू किया था। इसके प्रकाशक और संपादक वो खुद ही हुआ करतें थे। इस तरह हिंदी पत्रकारिता की शुरुआत करने का श्रेय पंडित जुगल किशोर शुक्ल को दिया जाता हैं व आपके नाम का हिंदी पत्रकारिता की जगत में विशेष सम्मान है।

जुगल किशोर शुक्ल वकील भी थे और कानपुर के रहने वाले थे। लेकिन उस समय औपनिवेशिक ब्रिटिश भारत में उन्होंने कलकत्ता को अपनी कर्मस्थली बनाया। परतंत्र भारत में हिंदुस्तानियों के हक की बात करना बहुत बड़ी चुनौती बन चुका था। इसी के लिए उन्होंने कलकत्ता के बड़ा बाजार इलाके में अमर तल्ला लेन, कोलूटोला से साप्ताहिक ‘उदन्त मार्तण्ड’ का प्रकाशन शुरू किया। यह साप्ताहिक अखबार हर हफ्ते मंगलवार को पाठकों तक पहुंचता था।


पराधीन भारत की राजधानी कलकत्ता में अंग्रजी शासकों की भाषा अंग्रेजी के बाद बांग्ला और उर्दू का प्रभाव था। इसलिए उस समय अंग्रेजी, बांग्ला और फारसी में कई समाचार पत्र निकलते थे। हिंदी भाषा का एक भी समाचार पत्र मौजूद नहीं था। 1818-19 में कलकत्ता स्कूल बुक के बांग्ला समाचार पत्र ‘समाचार दर्पण’ में कुछ हिस्से हिंदी में भी होते थे।

हालांकि ‘उदन्त मार्तण्ड’ एक साहसिक प्रयोग था। इस साप्ताहिक समाचार पत्र के पहले अंक की 500 प्रतियां छपी। हिंदी भाषी पाठकों की कमी की वजह से उसे ज्यादा पाठक नहीं मिल सके। दूसरी बात की हिंदी भाषी राज्यों से दूर होने के कारण उन्हें समाचार पत्र डाक द्वारा भेजना पड़ता था। महंगी डाक दरों की वजह से इसे हिंदी भाषी राज्यों में भेजना भी आर्थिक रूप से महंगा सौदा हो गया था।

पंडित जुगल किशोर के सरकार से बार बार अनुरोध के बाद भी डाक दरों में रियायत नहीं दी, जिससे हिंदी भाषी प्रदेशों में पाठकों तक समाचार पत्र भेजना बहुत महंगा पड़ रहा। ना ही किसी भी सरकारी विभाग ने ‘उदन्त मार्तण्ड’ की एक भी प्रति खरीदने पर भी रजामंदी दी।

पैसों की तंगी की वजह से ‘उदन्त मार्तण्ड’ का प्रकाशन बहुत दिनों तक नहीं हो सका और आखिरकार 4 दिसम्बर 1826 को इसका प्रकाशन बंद कर दिया गया।